स्वास्थ्य विभाग में लिपिकों की स्क्रीनिंग के आदेश से हड़कंप, विरोध शुरू

स्वास्थ्य विभाग में लिपिकों की स्क्रीनिंग के आदेश से हड़कंप, विरोध शुरू



लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग में 50 वर्ष से ऊपर के लिपिकीय संवर्ग के कर्मचारियों दक्षता की स्क्रीनिंग कराने के आदेश से हड़कंप मच गया है उप्र मेडिकल एंड पब्लिक हेल्थ मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन ने निदेशक प्रशासन डॉ. पूजा पांडेय को पत्र लिखकर इससे संबंधित कार्यालय ज्ञापन को निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल एंड पब्लिक हेल्थ मिनिस्ट्रियल दर्जनों संवर्ग हैं, लेकिन सिर्फ एसोसिएशन ने लिपिकों की स्क्रीनिंग के लिए की प्रक्रिया निरस्त कमेटी बनाना संवर्ग को करने की मांग हतोत्साहित करने जैसा है।



एसोसिएशन के महामंत्री हीरेश सक्सेना ने निदेशक प्रशासन को पत्र लिखकर जानकारी दी है कि स्वास्थ्य विभाग में लगभग तीन हजार लिपिक हैं। इस समय 1700 से अधिक पद खाली पड़े हैं। एक-एक लिपिक के पास दोगुना काम है। खाली पदों के सापेक्ष काम करने से सरकार का एक अरब रुपये वेतन के मद का भी बच रहा है। ऐसे में इस तरह का कार्यालय विज्ञापन उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के समय एक-एक कर्मचारी चार से छह घंटे अतिरिक्त राजकीय कार्य कर रहा है। स्क्रीनिंग के लिए कमेटी बनाने के आदेश से कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है ।


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