तीन साल रिटर्न फाइल नहीं तो 20% टीडीएस, बैंक ही टीडीएस काटकर जमा कर देगा

तीन साल रिटर्न फाइल नहीं तो 20% टीडीएस, बैंक ही टीडीएस काटकर जमा कर देगा


अगर आप रिटर्न फाइल नहीं करते और बैंकों से नकदी निकासी लाखों में करते हैं तो अलर्ट हो जाइए। इस तरह का नकदी लेनदेन करने वालों का 20 फीसदी टीडीएस कटेगा। यह राशि वापस भी नहीं होगी। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) ने भारी भरकम नकदी लेनदेन करने वालों को आयकर के दायरे में लाने के लिए यह घोषणा की है। 


गत दिवस सीबीडीटी ने एक जुलाई से इस व्यवस्था को क्रियान्वित कर दिया। सीबीडीटी ने आयकर में कई और घोषणाएं भी की। सीबीडीटी की नई घोषणा पर केंद्र सरकार के वित्त सलाहकार डॉ. पवन जायसवाल ने कहा कि तीन साल से जिनका रिटर्न फाइल नहीं हुआ और उनके पास पैन नंबर भी नहीं है। ऐसे लोग बैंकों से एक साल में 20 लाख से एक करोड़ तक लेनदेन करते हैं तो 20 प्रतिशत की टीडीएस कटौती शुरू हो जाएगी। 20 फीसदी टीडीएस की राशि 20 लाख से अधिक लेनदेन होते ही कटने लगेगी।



 डॉ जायसवाल ने कहा कि तीन साल का रिटर्न फाइल करने वालों से (20 लाख से एक करोड़ की निकासी) पर दो फीसदी टीडीएस कटेगा जो वापस होगा। एक करोड़ से अधिक की राशि पर पांच फीसदी टीडीएस कटेगा। शहर में ऐसे लोगों की संख्या हजारों में है जो 20 लाख से करोड़ों के लेनदेन करते हैं लेकिन आयकर रिटर्न फाइल नहीं करते। सीबीडीटी ऐसे लोगों को आयकर के दायरे में लाना चाहता है।


30 नवंबर तक फाइल करें अपना रिटर्न 
कोरोना संकट को देखते हुए सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज ने सभी रिटर्न फाइल करने की अवधि 30 नवंबर तक बढ़ा दी है। 31 तक किए गए निवेशों की कटौती की वित्तीय वर्ष 2019-20 में लागू होगी। टीडीएस के अंतिम त्रैमासिक रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 31 जुलाई कर दी गई है।


from shasnadesh.com शासनादेश डॉट कॉम | Government Orders | GO | Circulars https://ift.tt/31gHmLt
via IFTTT

Comments

Popular posts from this blog

उत्तर प्रदेश : पारिवारिक पेंशन की अनुमन्यता, परिवार का वर्गीकरण, पात्रता , मृत्यु उपादान व अतिरिक्त पेंशन संबंधी पूछे जाने लायक महत्वपूर्ण सवालों के जवाब एक जगह। Family Pension FAQ

संविदा कार्मिकों के ई0एस0आई0 नियोक्ता अंशदान के सम्बन्ध में महानिदेशक का आदेश जारी - esi Employer contribution

यूपी : लॉकडाउन में छूट देने पर दिशा निर्देश आज, तय होगा कि किस क्षेत्र में कितनी छूट दी जाए